भदोही: 10 साल पहले पिता की मौत, अब सांड के हमले में मां-बेटे ने भी तोड़ा दम
उप्र के भदोही जनपद के गोपीगंज थाना क्षेत्र के अमवा गांव में शुक्रवार देर शाम छुट्टा सांड के हमले की दर्दनाक घटना में मां और इकलौते बेटे की मौत हो गई।
भदोही से आनन्द तिवारी की रिपोर्ट
भदोही/जनमत न्यूज़। उप्र के भदोही जनपद के गोपीगंज थाना क्षेत्र के अमवा गांव में शुक्रवार देर शाम छुट्टा सांड के हमले की दर्दनाक घटना में मां और इकलौते बेटे की मौत हो गई। घर से किराने की दुकान पर सामान लेने बाइक से निकले मां-बेटे पर दुकान के सामने अचानक एक सांड ने हमला कर दिया। हमले में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए।
परिजन और ग्रामीण उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोपीगंज लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने दोनों को वाराणसी ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। एंबुलेंस से वाराणसी ले जाने के बाद उपचार के दौरान दोनों की मौत हो गई।
मृतकों की पहचान पर्वतपुर निवासी प्रांशु सिंह पुत्र स्व. जनार्दन सिंह उर्फ मुन्ना सिंह और उनकी मां विनीता सिंह पत्नी स्व. जनार्दन सिंह के रूप में हुई है। बताया गया कि मां-बेटे बाइक से घर से किराने की दुकान पर सामान लेने निकले थे।
दुकान के पास पहुंचते ही वहां मौजूद पशुओं के झुंड के बीच से एक सांड अचानक उनकी ओर दौड़ा और दोनों पर हमला कर दिया। सांड के हमले से दोनों सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों और परिजनों ने दोनों को संभाला और इलाज के लिए सीएचसी गोपीगंज पहुंचाया। चिकित्सकों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद वाराणसी ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। सरकारी एंबुलेंस से दोनों को वाराणसी ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान मां और बेटे दोनों ने दम तोड़ दिया।
दर्दनाक हादसे ने पहले से टूट चुके परिवार को पूरी तरह उजाड़ दिया। ग्रामीणों के मुताबिक, प्रांशु के पिता जनार्दन सिंह उर्फ मुन्ना सिंह की करीब 10 वर्ष पहले ही मौत हो चुकी थी।
पति की मौत के बाद विनीता सिंह ही परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। प्रांशु उनका इकलौता बेटा था और परिवार का सहारा भी। अब छुट्टा सांड के हमले में मां और इकलौते बेटे की मौत के बाद परिवार में कोई सहारा नहीं बचा है।
मां-बेटे की मौत की खबर गांव में पहुंचते ही शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों का कहना है कि संरक्षित पशुओं और सांडों के हमले की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं और कई लोग पहले भी इनका शिकार हो चुके हैं। लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर कब तक छुट्टा पशुओं के हमले में लोगों की जान जाती रहेगी।




