इटावा: CMS डॉ. परितोष शुक्ला की संवेदनशीलता, निजी राशि से मरीजों के लिए ठीक कराई ख़राब सड़क
उप्र के इटावा जिला चिकित्सालय में प्रशासनिक इच्छाशक्ति और संवेदनशीलता की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली है।
इटावा से पुनीत दीक्षित की रिपोर्ट
इटावा/जनमत न्यूज़। उप्र के इटावा जिला चिकित्सालय में प्रशासनिक इच्छाशक्ति और संवेदनशीलता की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली है। अक्सर सरकारी अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवस्थाओं के दावों और धरातल की हकीकत के बीच की दूरी पर चर्चाएं आम होती हैं, लेकिन इटावा जिला अस्पताल में आज एक ऐसी सकारात्मक तस्वीर सामने आई है जो व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में प्रेरणादायक है।
जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. परितोष शुक्ला ने अपने निजी धन से अस्पताल परिसर में एक महत्वपूर्ण कार्य कराया है, जिससे मरीजों और तीमारदारों को बड़ी राहत मिली है।
आमतौर पर जिला चिकित्सालय के आपातकालीन कक्ष यानी इमरजेंसी से मरीजों को एक्स-रे, सीटी स्कैन और विभिन्न वार्डों में शिफ्ट करने के दौरान उबड़-खाबड़ और खराब सड़क मार्ग से गुजरना पड़ता था। इस असुविधा के कारण गंभीर अवस्था में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
इस गंभीर समस्या को सीएमएस डॉ. परितोष शुक्ला ने व्यक्तिगत रूप से महसूस किया और बिना प्रशासनिक औपचारिकताओं के इंतजार में लंबा वक्त गंवाए, अपनी पहल पर व्यक्तिगत धन से इस मार्ग को दुरुस्त कराया।
इस संबंध में सीएमएस डॉ. परितोष शुक्ला का कहना है कि अस्पताल पहुंचने वाला मरीज पहले से ही गंभीर अवस्था में होता है। यदि ऐसी स्थिति में अस्पताल प्रशासन मरीज के स्वास्थ्य और उसकी तकलीफों के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखाता है, तो यह चिकित्सकीय पेशे के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पीड़ित मानवता की सेवा करना और हर मरीज की जान बचाना एक डॉक्टर का सर्वप्रथम और सबसे बड़ा कर्तव्य है। हालांकि, अस्पताल की कुछ अन्य बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए शासन और प्रशासन को पहले से ही पत्र लिखे जा चुके हैं, ताकि दीर्घकालिक और बड़े स्तर पर व्यवस्थाओं को और सुधारा जा सके।
अस्पताल में उपचार कराने पहुंचे कई मरीजों और उनके तीमारदारों से जब बात की गई, तो उन्होंने खुले तौर पर कहा कि जब से मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के रूप में डॉ. परितोष शुक्ला ने कार्यभार संभाला है, तब से जिला अस्पताल की कार्यशैली और आबोहवा में सकारात्मक बदलाव आया है।
मरीजों का कहना है कि अब यह परिसर किसी सरकारी अस्पताल की तरह नहीं बल्कि अपने घर जैसी सुरक्षित और अपनापन भरी अनुभूति कराता है, जहां हर आने वाले की तकलीफ को अपना समझकर दूर किया जाता है।



