बरेली में पकडा गया फर्जी कॉल सेंटर, सोशल मीडिया पर प्रसारित करते थे दवाइयों के भ्रामक विज्ञापन
उप्र के बरेली जनपद के इज्जतनगर थाना क्षेत्र पुलिस ने राजीव एन्क्लेव कॉलोनी में संचालित कथित फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
बरेली से अनूप रायजादा की रिपोर्ट
बरेली/जनमत न्यूज़। उप्र के बरेली जनपद के इज्जतनगर थाना क्षेत्र पुलिस ने राजीव एन्क्लेव कॉलोनी में संचालित कथित फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
आरोप है कि आरोपी खुद को डॉक्टर बताकर सोशल मीडिया पर भ्रामक विज्ञापन प्रसारित करते थे और बिना वैध लाइसेंस के तैयार की गई दवाइयां ऑनलाइन महंगे दामों पर बेचते थे।
पुलिस ने मौके से 85 पैकेज दवाइयां, 12 मोबाइल फोन, लैपटॉप, छह कंप्यूटर, आठ मॉनीटर, तीन प्रिंटर, छह चेकबुक, 14 एटीएम कार्ड, कूटरचित लाइसेंस और 1.99 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं।
पुलिस के अनुसार, छह अक्टूबर को मुखबिर से सूचना मिली थी कि राजीव एन्क्लेव कॉलोनी स्थित एक मकान में फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा है।
सूचना पर थाना इज्जतनगर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए समीरउद्दीन पुत्र अकीलउद्दीन निवासी वार्ड नंबर छह, देवरनियां और यूसुफ पुत्र इस्लाम निवासी बड़ी बिहार, इज्जतनगर को गिरफ्तार कर लिया। उनका साथी इलियास खान पुत्र इस्लाम मौके से फरार हो गया।
पुलिस को मौके पर आरोपी कैप्सूल में सामग्री भरकर उनकी पैकिंग करते मिले। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे इंस्टाग्राम पर हर्बल हैंड जड़ी-बूटी नाम से आईडी बनाकर खुद को डॉक्टर बताते थे और ऑनलाइन विज्ञापनों के माध्यम से लोगों को दवाइयां बेचते थे।
आरोपियों के मुताबिक दवाओं के लिए सामग्री सहारनपुर और मुरादाबाद से लाई जाती थी। उन्होंने देवरनियां में भी दुकान संचालित होने की जानकारी दी।
पुलिस के मुताबिक आरोपी करीब एक वर्ष से यह काम कर रहे थे और मुनाफा तीनों आपस में बांटते थे। आरोपियों के पास दवाइयों का कोई वैध लाइसेंस नहीं मिला। मौके से अलग-अलग नामों से दवाइयों के 85 पैकेज, पैकिंग सामग्री और संबंधित दस्तावेज भी बरामद किए गए।
इस मामले में थाना इज्जतनगर में बीएनएस के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने दोनों गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया। फरार आरोपी इलियास खान की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम प्रयास कर रही है। मामले की जांच में बरामद दस्तावेजों, बैंकिंग सामग्री और ऑनलाइन विज्ञापनों की भी पड़ताल की जा रही है।



