मुजफ्फरनगर CMO कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हिंदू संगठन के पदाधिकारी, स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर सवाल
उप्र के मुजफ्फरनगर जनपद में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। अस्पतालों पर सील लगाने और कुछ ही दिनों बाद उनके दोबारा संचालित होने के आरोपों को लेकर हिंदू संगठन के पदाधिकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय के बाहर बैठ गए।
मुजफ्फरनगर से संजय कुमार की रिपोर्ट
मुजफ्फरनगर/जनमत न्यूज़। उप्र के मुजफ्फरनगर जनपद में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। अस्पतालों पर सील लगाने और कुछ ही दिनों बाद उनके दोबारा संचालित होने के आरोपों को लेकर हिंदू संगठन के पदाधिकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय के बाहर बैठ गए।
संगठन के पदाधिकारियों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
हिंदू संगठन के पदाधिकारियों का सवाल है कि यदि किसी अस्पताल में अनियमितताएं मिलने पर उसे सील किया जाता है, तो आखिर दो दिन बाद ही वह दोबारा कैसे खुल जाता है?
विभाग ऐसी कौन-सी कमियों को महज दो दिनों में दूर मान लेता है, जिसके बाद अस्पताल फिर से सुचारू रूप से संचालित होने लगते हैं?
संगठन ने इन मामलों में पारदर्शिता बरतने और अस्पतालों को दोबारा खोलने की प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है। संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई को लेकर अब उनका विश्वास कमजोर हो गया है।
उनका आरोप है कि यदि अस्पतालों में गंभीर अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो केवल सील लगाने तक कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के विरुद्ध प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
हिंदू संगठन के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी उमेश मिश्रा से मामले का संज्ञान लेने की अपील करते हुए मांग की है कि अस्पतालों को दोबारा खोलने की अनुमति देने की प्रक्रिया की जांच कराई जाए। साथ ही, यदि जांच में फर्जी तरीके से संचालित अस्पताल या नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थान पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इन सवालों पर क्या कदम उठाते हैं और अस्पतालों को दोबारा खोलने के मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है।



