प्रतापगढ़: नवजात की मौत के बाद अवैध अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग का शिकंजा, डिप्टी सीएमओ ने किया सील

उप्र के प्रतापगढ़ जनपद में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। शहर के राजापाल चौराहे से कुछ दूरी पर एक आवासीय परिसर में कथित रूप से अवैध तरीके से संचालित किए जा रहे अस्पताल को स्वास्थ्य विभाग ने सील कर दिया।

प्रतापगढ़: नवजात की मौत के बाद अवैध अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग का शिकंजा, डिप्टी सीएमओ ने किया सील
Published By- Diwaker Mishra

प्रतापगढ़ से विकास गुप्ता की रिपोर्ट

प्रतापगढ़/जनमत न्यूज़। उप्र के प्रतापगढ़ जनपद में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। शहर के राजापाल चौराहे से कुछ दूरी पर एक आवासीय परिसर में कथित रूप से अवैध तरीके से संचालित किए जा रहे अस्पताल को स्वास्थ्य विभाग ने सील कर दिया।

यह कार्रवाई उस घटना के बाद की गई, जिसमें प्रसव के दौरान एक नवजात शिशु की मौत हो गई थी और अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।

मिली जानकारी के अनुसार, नवजात की मौत के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया। मामले की सूचना स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचने पर डिप्टी सीएमओ डॉ. राजेश कुमार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और जांच के दौरान अस्पताल के संचालन से संबंधित दस्तावेजों एवं मानकों की पड़ताल की गई।

जांच के उपरांत अस्पताल को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया तथा मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कार्रवाई के दौरान भी अस्पताल से जुड़े कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग की टीम के सामने ही दबाव बनाने और कार्रवाई में बाधा उत्पन्न करने की कोशिश की गई। इससे यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि आखिर ऐसे संस्थानों को संरक्षण कौन दे रहा था कि प्रशासनिक कार्रवाई के समय भी नियम-कानून की खुलेआम अवहेलना की जा सके।

वहीं अस्पताल की संचालिका बताई जा रही डॉ. शाहिदा सिद्दीकी कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद नहीं मिलीं। स्वास्थ्य विभाग की टीम के पहुंचने से पहले ही उनके फरार होने की चर्चा पूरे क्षेत्र में रही। इससे भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या उन्हें कार्रवाई की भनक पहले ही लग गई थी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे अस्पतालों की जांच होती और स्वास्थ्य विभाग नियमित निगरानी करता तो शायद किसी परिवार को अपने नवजात की जान नहीं गंवानी पड़ती। लोगों ने जिले में संचालित सभी निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों की व्यापक जांच की मांग की है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल अस्पताल सील कर देने से मामला समाप्त हो जाएगा, या फिर नवजात की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई भी की जाएगी?

जनता यह जानना चाहती है कि बिना मानकों और आवश्यक अनुमतियों के अस्पताल चलाने वालों के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई और उनके संरक्षण में कौन-कौन लोग शामिल थे।

फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद पूरे जिले में हड़कंप मचा हुआ है और अन्य निजी अस्पतालों में भी जांच की आशंका के चलते बेचैनी देखी जा रही है।