सीतापुर: मनरेगा भुगतान में गड़बड़ी में डीएम ने दिए थे जांच और वसूली के आदेश, अब कार्रवाई पर सवाल

सीतापुर/जनमत न्यूज़।

सीतापुर: मनरेगा भुगतान में गड़बड़ी में डीएम ने दिए थे जांच और वसूली के आदेश, अब कार्रवाई पर सवाल
Published By- Diwaker Mishra

सीतापुर से अनूप पांडेय की रिपोर्ट 

सीतापुर/जनमत न्यूज़। उप्र के सीतापुर जनपद के खैराबाद विकासखंड में मनरेगा के तहत कथित नियम विरुद्ध करोड़ो का भुगतान का मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर चर्चा में है।

तत्कालीन जिलाधिकारी अभिषेक आनंद ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए जांच कराने, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने और धनराशि की वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।

अब उनके स्थानांतरण के बाद नए जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर. के कार्यभार संभालने पर इस मामले में आगे क्या कार्रवाई हुई, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।

परिवार और रिश्तेदारों की फर्मों पर भुगतान का आरोप

जिलाधिकारी कार्यालय से जारी पत्र के अनुसार, आईजीआरएस संदर्भ संख्या 20015425032488, दिनांक 30 सितंबर 2025 के माध्यम से जिला पंचायत सदस्य अनूप कुमार त्रिपाठी द्वारा शिकायत की गई थी कि तत्कालीन एपीओ नितिन गुप्ता और पूर्व लेखाकार लक्ष्मी प्रकाश तिवारी द्वारा अपने परिवार एवं रिश्तेदारों की फर्मों के नाम मनरेगा में कथित तौर पर नियम विरुद्ध भुगतान कराया गया।

इस शिकायत के संबंध में खैराबाद के खंड विकास अधिकारी की ओर से 6 अक्टूबर 2025 को भेजे गए पत्र का हवाला देते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी ने 13 अक्टूबर 2025 को संबंधित अधिकारी को जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

जांच और वसूली के थे निर्देश

जिलाधिकारी के आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि मामले की नियमानुसार जांच कराई जाए। यदि अनियमितता की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करते हुए धनराशि की वसूली भी सुनिश्चित की जाए। मामले में आवश्यक कार्रवाई के लिए मुख्य विकास अधिकारी, सीतापुर को भी पत्र की प्रतिलिपि भेजी गई थी।

डीएम बदले, लेकिन कार्रवाई का क्या हुआ?

तत्कालीन जिलाधिकारी के स्थानांतरण के बाद डॉ. राजा गणपति आर ने सीतापुर के जिलाधिकारी का कार्यभार संभाला। अब सवाल यह है कि पूर्व जिलाधिकारी के आदेश पर जांच कहां तक पहुंची? क्या कथित अनियमित भुगतान की जांच पूरी हुई? क्या किसी की जिम्मेदारी तय की गई और सरकारी धन की वसूली के लिए कोई कदम उठाया गया?

शिकायतकर्ता की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही की कसौटी पर है। यदि जांच के आदेश जारी हुए थे, तो उनकी अनुपालन रिपोर्ट और अब तक की गई कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक होना चाहिए, ताकि मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

महत्वपूर्ण सवाल: मनरेगा में कथित अनियमित भुगतान की जांच और वसूली के आदेशों पर अमल हुआ या मामला फाइलों तक ही सीमित रह गया? इसका जवाब संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा।