भदोही में जातिगत भेदभाव से मानवता शर्मसार, जिला अस्पताल के सामने दलित समुदाय की प्रसूता का प्रसव
उप्र के भदोही जनपद के ज्ञानपुर स्थित महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाली तस्वीर सामने आई है।
भदोही से आनन्द तिवारी की रिपोर्ट
भदोही/जनमत न्यूज़। उप्र के भदोही जनपद के ज्ञानपुर स्थित महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाली तस्वीर सामने आई है। जोरई गांव के मुसहर बस्ती के लोग प्रसव पीड़िता रानी देवी को दर्द उठने पर मंगलवार को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे।
आरोप है कि अस्पताल में इलाज और जांच शुरू होने से पहले ही उन्हें दूसरे अस्पताल, यहां तक कि बीएचयू जाने की बात कही गई। इसी बीच अस्पताल के मुख्य गेट पर ही महिला की प्रसव पीड़ा बढ़ गई और परिजनों ने सड़क किनारे कंबल की ओट में उसका प्रसव कराया।
परिजनों ने महिला के अति दलित समुदाय से होने के कारण इलाज नहीं करने का आरोप लगाया है। मामले में सीएमओ ने जांच टीम गठित की है, जबकि जिला अस्पताल के सीएमएस ने खुद लापरवाही होने की बात मानी है। इस घटना ने मानवता को झकझोर कर रख दिया है।
दरअसल, भदोही के माधोसिंह की निवासी रानी पत्नी राधेश्याम वनवासी डिलीवरी कराने हेतु कुछ दिन पहले अपने मायके, ज्ञानपुर के पास जोरई गांव आई थी। प्रसव पीड़िता के भाई विजय बनवासी और अन्य परिजन रानी को प्रसव पीड़ा होने पर सरकारी एंबुलेंस से महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल ज्ञानपुर लेकर पहुंचे थे।
आरोप है कि महिला को अस्पताल में भर्ती कर तत्काल चिकित्सकीय सहायता देने के बजाय उसे दूसरे अस्पताल जाने को कहा गया। परिजनों के मुताबिक, बीएचयू रेफर करने की बात भी कही गई।
इसके बाद परिजन महिला को लेकर अस्पताल से बाहर निकल रहे थे, तभी मुख्य गेट पर उसकी प्रसव पीड़ा बढ़ गई। अस्पताल के बाहर सड़क किनारे कंबल की ओट में महिला ने बच्चे को जन्म दिया।
सैकड़ों लोगों की आवाजाही वाले अस्पताल के मुख्य गेट पर प्रसव की तस्वीर सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए। परिजनों ने आरोप लगाया कि महिला के गरीब और मुसहर समुदाय से होने के कारण उसके इलाज में लापरवाही की गई। हालांकि, जातिगत भेदभाव के आरोप की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
मामले की जानकारी के बाद सीएमओ डॉ. संतोष कुमार चक मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाकर महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया। जिला अस्पताल के सीएमएस ने भी माना कि महिला के इलाज में लापरवाही हुई।
उनके मुताबिक, महिला का हीमोग्लोबिन कम था और पहले रक्त बढ़ाने के लिए उपचार किया जाना था। स्टाफ नर्स ने महिला को सीधे रेफर कर दिया, जबकि महिला रोग विशेषज्ञ को ऑन कॉल बुलाकर मरीज को दिखाया जाना चाहिए था।
सीएमएस ने बताया कि लापरवाही के मामले में संबंधित स्टाफ नर्स का तीन दिन का वेतन बाधित किया गया है। स्टाफ नर्स और जिम्मेदार महिला चिकित्सकों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। वहीं, सीएमओ ने पूरे मामले की जांच के लिए टीम गठित की है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को भी लिखा जाएगा।
सीएमएस के मुताबिक, फिलहाल महिला का अस्पताल में इलाज और स्वास्थ्य देखभाल जारी है और जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। वहीं, अति दलित होने के कारण इलाज नहीं मिलने के परिजनों के आरोप पर सीएमएस ने कहा कि इस संबंध में जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
घटना ने सवाल खड़ा कर दिया है कि जब प्रसव पीड़ा से जूझती महिला जिला अस्पताल पहुंची थी, तो उसे तत्काल चिकित्सकीय सहायता क्यों नहीं मिली और अस्पताल के मुख्य गेट पर सड़क किनारे प्रसव की नौबत कैसे आई और जान से खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई के नाम पर चंद दिनों की जांच काफी है क्या? क्या दिन का वेतन रोकना काफी है क्या?



