प्रतापगढ़ में अधिवक्ताओं का कार्यबहिष्कार, हाईकोर्ट-बार कौंसिल के आदेश के विरोध में प्रदर्शन

हाईकोर्ट के आदेश के हवाले से बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश द्वारा जारी आदेश के विरोध में गुरुवार को उप्र के प्रतापगढ़ जनपद के अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से विरत रहकर प्रदर्शन किया।

प्रतापगढ़ में अधिवक्ताओं का कार्यबहिष्कार, हाईकोर्ट-बार कौंसिल के आदेश के विरोध में प्रदर्शन
Published By- Diwaker Mishra

प्रतापगढ़ से विकास गुप्ता की रिपोर्ट

प्रतापगढ़/जनमत न्यूज़। हाईकोर्ट के आदेश के हवाले से बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश द्वारा जारी आदेश के विरोध में गुरुवार को उप्र के प्रतापगढ़ जनपद के अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से विरत रहकर प्रदर्शन किया।

जूनियर बार एसोसिएशन (पुरातन) के अध्यक्ष पं. करुणा शंकर मिश्र और महामंत्री कौशलेश कुमार त्रिपाठी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अधिवक्ता कचहरी परिसर में एकत्र हुए और जमकर नारेबाजी की। अधिवक्ताओं ने बार कौंसिल के आदेश को तुगलकी फरमानबताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अधिवक्ताओं के हितों, अधिकारों और सम्मान से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। एसोसिएशन पदाधिकारियों ने कहा कि आम अधिवक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन हर स्तर पर संघर्ष करेगा।

अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित 16 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।

16 सूत्रीय मांगों में उठाए स्थानीय मुद्दे ज्ञापन में कलेक्ट्रेट परिसर की जर्जर एवं जलमग्न सड़कों की मरम्मत, अधिवक्ताओं की सुरक्षा को देखते हुए शस्त्र लाइसेंस की पत्रावलियों को स्वीकृत करने, कचहरी परिसर में पार्किंग की व्यवस्था करने और कलेक्ट्रेट के गेटों पर अधिवक्ताओं के वाहनों को प्राथमिकता से प्रवेश देने की मांग की गई।

इसके अलावा संजय लॉज के सामने संचालित सुलभ कॉम्प्लेक्स का एक गेट कलेक्ट्रेट परिसर की ओर खुलवाने, बंद पड़ी कैंटीन की नीलामी कराकर संचालन शुरू कराने और शौचालयों की नियमित सफाई के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति की मांग भी रखी गई।

अधिवक्ताओं ने उप-निबंधक (रजिस्ट्री) कार्यालय और तहसील सदर में कथित भ्रष्टाचार एवं रिश्वतखोरी पर अंकुश लगाने, कलेक्ट्रेट परिसर में रात आठ बजे के बाद जुआ-शराब जैसी अवैध गतिविधियों पर FIR दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की।

इसके साथ ही RO वाटर व्यवस्था बहाल करने, दो वर्ष से अधिक समय से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारियों के स्थानांतरण तथा चकबंदी अधिकारी द्वितीय न्यायालय को रिक्त DDC कोर्ट में स्थापित करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।

ज्ञापन सौंपने के दौरान वरिष्ठ उपाध्यक्ष शांति भूषण त्रिपाठी, उपाध्यक्ष आशीष कुमार श्रीवास्तव, रवि कुमार द्विवेदी, कनिष्ठ उपाध्यक्ष कुंवर वीर विक्रम सिंह, कोषाध्यक्ष आनंद कुमार पांडेय, संयुक्त मंत्री अभिनव प्रताप सिंह, सतीश तिवारी (भारत),

अरुण कुमार पांडेय, वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य द्वारिका प्रसाद मिश्र, मिश्री लाल यादव, धीरेंद्र कुमार तिवारी, राकेश कुमार गुप्ता, धीरेंद्र कुमार शर्मा, अनिल कुमार मिश्र समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।