मथुरा: 'गाय को घोषित करो राष्ट्रमाता', गोद में बछड़ा लेकर SDM दफ्तर पहुंचे साधु-संत और गौभक्त
उप्र की धर्मनगरी मथुरा में एक बार फिर गाय को 'राष्ट्रमाता' का दर्जा दिलाने की मांग ने तूल पकड़ लिया है।
मथुरा से सैयद जाहिद की रिपोर्ट
मथुरा/जनमत न्यूज़। उप्र की धर्मनगरी मथुरा में एक बार फिर गाय को 'राष्ट्रमाता' का दर्जा दिलाने की मांग ने तूल पकड़ लिया है। आज सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर में उस वक्त अनोखा नजारा देखने को मिला, जब सैकड़ों की संख्या में गौ सेवक, साधु-संत और हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता हाथों में बैनर-तख्तियां लेकर और गोद में गौवंश (बछड़े) को उठाए एसडीएम कार्यालय पहुंच गए।
भजन-कीर्तन के साथ हुआ प्रदर्शन
मथुरा के विभिन्न अखाड़ों से आए साधु-संतों और गौ रक्षकों के इस जत्थे ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी नहीं, बल्कि गौ माता के जयकारों और भजनों के साथ अपनी मांग रखी।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था का आधार है। लंबे समय से गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
राष्ट्रपति और पीएम के नाम सौंपा ज्ञापन
गौ रक्षकों ने एसडीएम गोवर्धन के माध्यम से देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें रखी गई हैं-
- गाय को अविलंब 'राष्ट्रमाता' घोषित किया जाए।
- पूरे देश में गौ हत्या के खिलाफ सख्त केंद्रीय कानून बने।
- गौवंश के लिए आरक्षित चरगाह भूमियों को भू-माफियाओं के कब्जे से मुक्त कराया जाए।
- सरकारी गौशालाओं में चारे और चिकित्सा की व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए।
जब तक मांग पूरी नहीं, आंदोलन जारी रहेगा
प्रदर्शन में शामिल प्रमुख संतों ने कहा कि ब्रज भूमि से उठी यह आवाज अब पूरे देश में गूंजेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस दिशा में जल्द ही कोई कदम नहीं उठाया, तो दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
गौभक्त श्रेयस ने कहा गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देना करोड़ों हिंदुओं की आस्था का सम्मान होगा। हम तब तक शांत नहीं बैठेंगे जब तक गौ माता को वह सम्मान नहीं मिल जाता जिसकी वह हकदार हैं।
इस दौरान एसडीएम कार्यालय के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। एसडीएम गोवर्धन सुरेंद्र सिंह ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया है कि उनका ज्ञापन उच्च अधिकारियों के माध्यम से सरकार तक पहुंचा दिया जाएगा।

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