संभल: सपा विधायक के मुतवल्ली वाले निर्माण पर प्रशासन का शिकंजा, मौलाना आरिफ के घर नोटिस चस्पा
उप्र के संभल जनपद की सियासत में इस वक्त एक सरकारी आदेश ने हलचल मचा दी है। सपा विधायक इकबाल महमूद का नाम जिस निर्माण के मुतवल्ली के तौर पर दर्ज है।
संभल से रामव्रेश यादव की रिपोर्ट
संभल/जनमत न्यूज़। उप्र के संभल जनपद की सियासत में इस वक्त एक सरकारी आदेश ने हलचल मचा दी है। सपा विधायक इकबाल महमूद का नाम जिस निर्माण के मुतवल्ली के तौर पर दर्ज है।
उसी तीन मंजिला निर्माण को प्रशासन ने अवैध घोषित कर दिया है। मामला जिलाधिकारी की अदालत तक पहुंचा, लेकिन वहां भी अपील खारिज हो गई। अब प्रशासन ने 15 दिन का सीधा अल्टीमेटम दे दिया है।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि 15 दिन के भीतर निर्माण खुद गिराइए, वरना प्रशासन खुद कार्रवाई करेगा और ध्वस्तीकरण का खर्च भी भू-राजस्व के बकाये की तरह वसूला जाएगा। फिलहाल प्रशासन ने नोटिस चस्पा करने की कार्रवाई की है।
पूरा मामला जनपद के थाना रायसत्ती क्षेत्र के मियां सराय फुलवार का है। प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, यहां करीब 53×60 वर्गफुट क्षेत्रफल में तीन मंजिला भवन का निर्माण कराया गया है। आरोप है कि भवन का निर्माण बिना स्वीकृत मानचित्र के किया गया है।
संभल SDM विकास चंद्र के आदेश के मुताबिक, मौलाना आरिफ पुत्र अय्यूब अहमद उर्फ छिद्दा पहलवान और किरायेदार अय्यूब अहमद पुत्र मकबूल अहमद के साथ मुतवल्ली नवाब इकबाल महमूद के नाम से दर्ज स्थल पर करीब 53×60 क्षेत्रफल में तीन मंजिला निर्माण बिना स्वीकृत मानचित्र के कराया गया।
अवर अभियंता, विनियमित क्षेत्र संभल की 20 जून 2022 की रिपोर्ट के आधार पर 22 जून 2022 को कारण बताओ नोटिस जारी कर वाद दर्ज किया गया था। सुनवाई के बाद 5 फरवरी 2026 को निर्माण को अवैध घोषित करते हुए उत्तर प्रदेश निर्माण विनियमन अधिनियम, 1958 की धारा 10 के तहत इसे गिराने का आदेश दिया गया।
इसके खिलाफ 17 मार्च 2026 को जिलाधिकारी संभल के न्यायालय में अपील दाखिल की गई लेकिन अब 11 अगस्त 2026 के आदेश में जिलाधिकारी न्यायालय ने अपील खारिज कर दी और अवैध निर्माण को गिराने के पुराने आदेश को बरकरार रखा।
अब प्रशासन ने संबंधित पक्ष को आदेश प्राप्त होने की तारीख से 15 दिन के भीतर निर्माण स्वयं गिराने का निर्देश दिया है। आदेश में साफ कहा गया है कि तय समय में निर्माण नहीं गिराया गया तो नियत प्राधिकारी खुद इसे ध्वस्त करा सकता है और ध्वस्तीकरण में आने वाला खर्च भू-राजस्व के बकाये की तरह वसूल किया जाएगा।
यानी अब मामला सिर्फ नोटिस और सुनवाई तक सीमित नहीं है। जिलाधिकारी न्यायालय से अपील खारिज होने के बाद अवैध घोषित निर्माण पर कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। वहीं, आज मौलाना आरिफ के घर पर पुलिस-प्रशासन की टीम पहुंची और नोटिस चस्पा करने की कार्रवाई की।
एसडीएम विकास चंद्र ने बताया कि मोहम्मद आरिफ और मोहम्मद अयूब के खिलाफ 22 जून 2022 को अभियंता की रिपोर्ट के आधार पर नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद संबंधित अधिकारी के समक्ष मुकदमा चला। 5 फरवरी 2026 को अवैध निर्माण को गिराए जाने का आदेश पारित किया गया।
इसके बाद दोनों की ओर से जिलाधिकारी महोदय के समक्ष अपील की गई, जिसे 11 अगस्त 2026 को खारिज कर दिया गया। एसडीएम ने बताया कि तीन मंजिला मकान का निर्माण बिना नक्शा पास कराए किया गया था और इसे अवैध घोषित किया गया है।
प्रशासन की ओर से मकान को 15 दिन के अंदर खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित समय में मकान खाली नहीं करने पर प्रशासन द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यह मकान डेरा सारी मोहल्ले में स्थित है। उन्होंने बताया कि अवैध निर्माण के खिलाफ की गई अपील भी खारिज हो चुकी है।







