शाहजहांपुर: पुलिस की वर्दी का रौब या रिश्तों में विश्वासघात, सगी बहन ने भाई पर लगाए ठगी के आरोप

उप्र के शाहजहांपुर जनपद के थाना रामचंद्र मिशन क्षेत्र के ग्राम रौसर कोठी से सामने आया है, जहां एक महिला ने अपने ही सगे भाई पर दो लाख रुपये वापस न करने, शादी के जेवर और साड़ियां नहीं लौटाने तथा अपने परिवार के साथ मारपीट किए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

शाहजहांपुर: पुलिस की वर्दी का रौब या रिश्तों में विश्वासघात, सगी बहन ने भाई पर लगाए ठगी के आरोप
Published By- Diwaker Mishra

शाहजहांपुर से राजीव शुक्ला की रिपोर्ट 

शाहजहांपुर/जनमत न्यूज़। कहते हैं कि रिश्तों में जब विश्वास टूटता है, तो दर्द सिर्फ दिल को नहीं, पूरे परिवार को झकझोर देता है और जब आरोप किसी अपने पर लगें, तो इंसाफ की उम्मीद और भी बड़ी हो जाती है।

एक ऐसा ही मामला उप्र के शाहजहांपुर जनपद के थाना रामचंद्र मिशन क्षेत्र के ग्राम रौसर कोठी से सामने आया है, जहां एक महिला ने अपने ही सगे भाई पर दो लाख रुपये वापस न करने, शादी के जेवर और साड़ियां नहीं लौटाने तथा अपने परिवार के साथ मारपीट किए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

पीड़िता ओमवती कश्यप का आरोप है कि उनका भाई पुलिस विभाग में होने के कारण उनकी शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।

ओमवती का आरोप है कि शादी के कुछ महीने बाद उनके भाई ललित ने गाड़ी खरीदने के लिए दो महीने के वास्ते दो लाख रुपये उधार मांगे। बहन और बहनोई ने भरोसा करके कथित तौर पर दो लाख रुपये नकद दे दिए लेकिन आरोप है कि तय समय बीतने के बाद जब रुपये वापस मांगे गए, तो मामला टालमटोल में उलझता चला गया।

पीड़िता के अनुसार, इसके बाद मायके में एक शादी का कार्यक्रम हुआ। वह अपने साथ जेवर और तीन-चार नई साड़ियां लेकर मायके पहुंचीं।

शादी का कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जब उन्होंने अपने पिता विश्वनाथ, मां शांति और दो छोटे भाइयों से पति के पैसे वापस करने की बात कही, तो उनके आरोप के मुताबिक विवाद बढ़ गया और उनके साथ मारपीट की गई।और पीड़िता ओमवती का माल ज़ेवर भी अपने पास रख लिया

ओमवती का यह भी आरोप है कि उन्हें लेने पहुंचे उनके पति सोनू कश्यप के साथ भी मारपीट की गई और दोनों को घर से निकाल दिया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना अभी बाकी है।

पांच साल बाद भी इंसाफ का इंतजार

पीड़िता का कहना है कि घटना के बाद उन्होंने थाना रामचंद्र मिशन में शिकायत की थी। उनके मुताबिक, थाने में दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया गया था और उनके मायके वालों ने कथित तौर पर जेवर व साड़ियां अपने पास होने की बात स्वीकार की थी।

ओमवती का आरोप है कि समझौते के बावजूद आज तक न तो उनके दो लाख रुपये वापस मिले और न ही उनका जेवर और साड़ियां उन्हें लौटाई गईं।

अब सवाल यह है कि यदि समझौते में सामान लौटाने की बात हुई थी, तो उस पर क्या कार्रवाई हुई? क्या मामले से संबंधित कोई लिखित समझौता मौजूद है? और पीड़िता की शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई की गई? इन सवालों का जवाब संबंधित पुलिस अधिकारियों और दूसरे पक्ष का पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

परिवार की सुरक्षा को लेकर भी चिंता

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि उनके मायके पक्ष के लोग उनकी सास और छोटे देवर को गालियां देते हैं तथा पूरे परिवार को जान से मारने की धमकियां देते हैं। ओमवती का कहना है कि वह लंबे समय से परेशान हैं और अब पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगा रही हैं।

यह मामला केवल कथित लेन-देन का नहीं, बल्कि महिला के द्वारा लगाए गए मारपीट, सामान वापस न मिलने और सुरक्षा संबंधी आरोपों का भी है।

यदि धमकियों की शिकायत की गई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है।”

अब देखना होगा कि पुलिस अधीक्षक महोदय इस मामले में क्या संज्ञान लेते हैं और पीड़िता की शिकायत पर क्या कार्रवाई होती है।

“सवाल सीधा है—क्या एक महिला को अपने ही परिवार से जुड़े विवाद में न्याय पाने के लिए सालों तक इंतजार करना पड़ेगा?

क्या शिकायत की जांच रिश्तों या किसी के पद से प्रभावित हुए बिना होनी चाहिए? बिल्कुल!

कानून की नजर में हर शिकायत की निष्पक्ष जांच जरूरी है। आरोप सही हैं या नहीं, इसका फैसला जांच और साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए।

फिलहाल पीड़िता ओमवती कश्यप न्याय की आस लगाए बैठी हैं और उनकी निगाहें पुलिस अधीक्षक की कार्रवाई पर टिकी हैं।