शाहजहांपुर: ‘सड़क नहीं बनी तो वोट नहीं’ के नारे के साथ चुनाव बहिष्कार का ऐलान, घर-घर लगे पोस्टर
खबर उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जनपद से है। जहां विकास के दावों के बीच सड़क की बदहाली से परेशान ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
शाहजहांपुर से राजीव शुक्ला की रिपोर्ट
शाहजहांपुर/जनमत न्यूज़। खबर उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जनपद से है। जहां विकास के दावों के बीच सड़क की बदहाली से परेशान ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
ग्रामीणों का साफ कहना है- सड़क नहीं तो वोट नहीं!
जी हां! बंडा क्षेत्र में लगभग 11 किलोमीटर लंबी जर्जर सड़क को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। गांव की गलियों से लेकर घरों के दरवाजों तक विरोध के पोस्टर लगाए गए हैं। अब ग्रामीणों ने सड़क निर्माण होने तक मतदान का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है।
आपको बता दें शाहजहांपुर जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर बंडा क्षेत्र की यह तस्वीरें सरकारी विकास व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं।
बंडा-बिलसंडा मार्ग से खकरा बुजुर्ग, भौरखेड़ा खुर्द, कुंडरा, चिकटिया और ढुकरी बुजुर्ग होते हुए बिहार रामनगर तक जाने वाली करीब 11 किलोमीटर सड़क लंबे समय से जर्जर हालत में बताई जा रही है।
बरसात के मौसम में सड़क पर कीचड़, गंदगी और जलभराव के कारण ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों के मुताबिक इस बदहाल सड़क से करीब 20 हजार लोगों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। खास बात यह है कि बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव के पैतृक गांव कुंडरा के लोग भी इस सड़क की बदहाली से परेशान बताए जा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कई वर्षों से मंत्री, सांसद, जनप्रतिनिधि, लोक निर्माण विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
आखिरकार ग्रामीणों ने अपने घरों, दरवाजों और गांव के रास्तों पर पोस्टर लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया है।आप देख सकते है
पोस्टरों पर साफ लिखा है—
रोड नहीं तो वोट नहीं!
ग्रामीणों का सवाल है कि जब गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क ही नहीं है, तो विकास के दावों का लाभ आखिर उन्हें कैसे मिलेगा?
बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों और रोजाना काम पर जाने वाले लोगों को इस रास्ते से गुजरने में परेशानियां उठानी पड़ती हैं। अब ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक सड़क का निर्माण नहीं कराया जाएगा, तब तक वे मतदान में हिस्सा नहीं लेंगे।
फिलहाल बंडा क्षेत्र के ग्रामीणों ने अपना संदेश साफ कर दिया है—
सड़क बनवाइए, तभी वोट पाइए!
अब सवाल यह है कि क्या ग्रामीणों को अपनी बुनियादी सुविधा के लिए मतदान बहिष्कार जैसा कदम उठाना पड़ेगा?
इस मामले में संबंधित विभाग और प्रशासन का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।



