शाहजहांपुर: 10 साल से आवास की आस में रमेश वाल्मीकि का परिवार, सर्वे के बाद भी नहीं मिला लाभ

सरकार गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए आवास योजनाएं चला रही है, लेकिन उप्र के शाहजहांपुर जिले के तिलहर क्षेत्र के ग्राम कबरा हुसैनपुर में रमेश वाल्मीकि का परिवार पिछले 10 वर्षों से आवास मिलने की उम्मीद लगाए बैठा है।

शाहजहांपुर: 10 साल से आवास की आस में रमेश वाल्मीकि का परिवार, सर्वे के बाद भी नहीं मिला लाभ
Published By- Diwaker Mishra

शाहजहांपुर से राजीव शुक्ला की रिपोर्ट

शाहजहांपुर/जनमत न्यूज़। सरकार गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए आवास योजनाएं चला रही है, लेकिन उप्र के शाहजहांपुर जिले के तिलहर क्षेत्र के ग्राम कबरा हुसैनपुर में रमेश वाल्मीकि का परिवार पिछले 10 वर्षों से आवास मिलने की उम्मीद लगाए बैठा है। परिवार का आरोप है कि बार-बार सर्वे होने और आवेदन करने के बावजूद उसे योजना का लाभ नहीं मिल रहा है।

रमेश वाल्मीकि का कहना है कि पिछले कई वर्षों में प्रधान और सेक्रेटरी की ओर से करीब 10 बार सर्वे कराया गया, लेकिन हर बार मामला आगे नहीं बढ़ सका। उनके अनुसार, प्रधान और सेक्रेटरी ने पक्का मकान होने की बात कहकर उन्हें अपात्र बताया। रमेश का दावा है कि उन्होंने ऑनलाइन आवेदन भी कराया था, लेकिन इसके बावजूद उनका नाम सूची से कट गया।

परिवार की महिला ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि एक तरफ पात्र लोगों को आवास मिलने की बात कही जा रही है, वहीं उनका परिवार वर्षों से कच्चे मकान में रहने को मजबूर है। ऐसे में सवाल उठता है कि बार-बार सर्वे होने के बाद भी परिवार की समस्या का समाधान क्यों नहीं हो सका।

10 साल में 10 सर्वे, फिर भी समाधान नहीं

यदि परिवार वास्तव में पात्र है, तो उसे योजना का लाभ दिलाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक क्या कदम उठाए? वहीं, यदि परिवार को अपात्र माना गया है, तो उसके पीछे क्या आधार है? इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना जरूरी है।

मामले में ग्राम प्रधान सुखलाल, सेक्रेटरी और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को परिवार की पात्रता की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। साथ ही, सर्वे रिपोर्ट और आवास सूची की जांच कर पात्रता के संबंध में पारदर्शी जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि किसी जरूरतमंद परिवार को सरकारी योजना के लाभ से वंचित न रहना पड़े।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत का संज्ञान लेकर परिवार को राहत दिलाता है, या रमेश वाल्मीकि का परिवार आवास की आस में यूं ही इंतजार करता रहेगा।