रायबरेली के रवि उर्फ आदित्य हत्याकांड के फैसले से गरमाई सियासत, सपा नेता समेत 14 को उम्रकैद
उप्र के रायबरेली जनपद में वर्ष 2019 में 9-10 अक्टूबर की रात हुए रवि उर्फ आदित्य हत्याकांड में जनपद न्यायालय के फैसले के बाद जिले की सियासत गरमा गई है।
रायबरेली से महताब खान की रिपोर्ट
रायबरेली/जनमत न्यूज़। उप्र के रायबरेली जनपद में वर्ष 2019 में 9-10 अक्टूबर की रात हुए रवि उर्फ आदित्य हत्याकांड में जनपद न्यायालय के फैसले के बाद जिले की सियासत गरमा गई है। न्यायालय ने मामले में 16 अभियुक्तों में से 14 को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
रामकृष्ण यादव और अभितेज प्रताप सिंह को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया। चर्चित हत्याकांड में सपा नेता आरपी यादव का नाम भी दोषियों में शामिल होने के बाद राजनीतिक गलियारों में फैसले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
आरपी यादव सदर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और पूर्व में भाजपा की तत्कालीन विधायक अदिति सिंह को चुनाव में कड़ी टक्कर दे चुके हैं। फैसले के बाद उनके पुराने राजनीतिक बयानों और इस मामले को लेकर उनकी भूमिका पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
आरपी यादव ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस गाड़ी से एक्सीडेंट हुआ था, वह ठाकुर की थी, इसलिए उन्हें छोड़ दिया गया। उनके इस बयान के बाद मामले को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
मामले में ढाबा मालिक सुरेश यादव, उनके पुत्र अर्कित यादव उर्फ सोमू, भाई रमेश यादव, ढाबा कर्मचारी लवकुश तिवारी, हर्षित वर्मा, आरपी यादव, सौरभ और मानू बारी समेत कुल 14 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 13 गवाह पेश किए गए। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले ने करीब सात वर्ष पुराने हत्याकांड को एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। पीड़ित परिवार लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहा था। फैसला आने के बाद परिजनों ने इसे न्याय की बड़ी जीत बताया।
वहीं, दो आरोपियों के साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त होने से मामले के कानूनी पहलुओं पर भी चर्चा शुरू हो गई है। न्यायालय के फैसले के बाद अब इस मामले का राजनीतिक असर क्या होगा और जिले की राजनीति में इसके क्या समीकरण बनेंगे, इस पर भी लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।







