रामपुर: बायोमीट्रिक ने जुड़वा बहनों की पहचान में डाला अड़ंगा, डीएम की पहल से मिला समाधान

उप्र के रामपुर शहर के मोहल्ला खारी कुआं निवासी जुबैर इलियास की जुड़वा बेटियों तुबा जुबैर और खिजरा जुबैर के लिए बायोमीट्रिक पहचान प्रणाली कई वर्षों तक परेशानी का कारण बनी रही।

रामपुर: बायोमीट्रिक ने जुड़वा बहनों की पहचान में डाला अड़ंगा, डीएम की पहल से मिला समाधान
Published By- Diwaker Mishra

रामपुर से अभिषेक शर्मा की रिपोर्ट

रामपुर/जनमत न्यूज़। उप्र के रामपुर शहर के मोहल्ला खारी कुआं निवासी जुबैर इलियास की जुड़वा बेटियों तुबा जुबैर और खिजरा जुबैर के लिए बायोमीट्रिक पहचान प्रणाली कई वर्षों तक परेशानी का कारण बनी रही। दोनों बच्चियों के फिंगरप्रिंट और आंखों के बायोमीट्रिक डेटा में अधिक समानता के चलते पहचान प्रणाली दूसरी बच्ची को अलग व्यक्ति के रूप में स्वीकार नहीं कर पा रही थी।

दरअसल, एक बच्ची का पहचान पत्र बनने के बाद जब दूसरी बच्ची के नामांकन की प्रक्रिया शुरू की गई तो बायोमीट्रिक मिलान प्रणाली ने उसके डेटा को पहले से पंजीकृत डेटा से मिलता-जुलता पाया। आवेदन को डुप्लीकेट डेटा बताते हुए आगे की प्रक्रिया रोक दी गई। परिवार ने स्थानीय स्तर पर कई बार प्रयास किए, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।

पहचान पत्र नहीं बन पाने के कारण बच्ची के स्कूल में प्रवेश सहित सरकारी योजनाओं से जुड़े कार्यों को लेकर परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। मामला जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के संज्ञान में पहुंचा तो उन्होंने इसके समाधान के लिए पहल की।

डीएम की पहल के बाद मामला UIDAI मुख्यालय, नई दिल्ली तक पहुंचा, जहां विशेषज्ञों ने मामले का तकनीकी परीक्षण कर विशेष समाधान निकाला। इसके बाद दोनों जुड़वा बहनों की अलग-अलग पहचान स्थापित करते हुए उनके अलग-अलग पहचान पत्र जारी कर दिए गए।

पहचान पत्र जारी होने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली। यह मामला जुड़वा बच्चों के बायोमीट्रिक नामांकन में आने वाली तकनीकी चुनौतियों और उनके समाधान का एक उदाहरण बन गया है।